Friday, 23 March 2018

To get fit how many calories should be get?

To get fit how many calories should be get?

आप को दिन भर में कितनी Calorie consume करनी चाहिए ये 4 चीजों पर निर्भर करता है:

1) आपका Weight
2) आपकी Age
3) आपका Activity Level
4) आपका Gender (Male/Female)


जिंदा रहने के लिए हमें उर्जा की ज़रुरत होती है जो हमें Calories के form में खाने-पीने की चीजों से मिलती है. यदि हम दिन भर  सोते भी रहे तो भी body को energy  की आवश्यकता पड़ती है ताकि हामारे अंग सही तरह से काम करते रहे. इसी को हम BMR कहते हैं.

Basal Metabolic Rate (BMR)
BMR कैलोरी की वो मात्रा  है जो हमें basic body function जैसे कि सांस लेना, पाचन क्रिया, इत्यादि ,चलाने के लिए चाहिए होती है. किसी भी व्यक्ति को हर रोज़ कम से कम इतनी calorie लेनी ही चाहिए. BMR हर किसी के लिए अलग अलग होती है . पर on an average पुरुषों के लिए यह 1600-1800 Calorie और महिलाओं के लिए 1300-1500 Calorie per day होती है.
यहाँ मैं आपके साथ कुछ charts share कर रहा हूँ जो आपको आपके sex, weight और age group  के हिसाब से आपको हर रोज़ कितनी Calorie लेनी  चाहिए बताएँगे, ज़ाहिर है कि आपकी actual calorie needs  आपके activity level के हिसाब से vary करेगी. पर यहाँ से आपको एक ठीक-ठाक अनुमान मिल सकता है:







मोटापा कम करने के 7 योगासन

YOGA TO REDUCE WEIGHT IN HINDI / YOGA TO REDUCE FAT IN HINDI

वजन घटाने के लिए योगासन / मोटापा कम करने के लिए योगासन
हमारी प्राचीन संस्कृति में कई लाभदायक योगासन बताए गए हैं जिस के नित्य प्रयोग से शरीर स्वस्थ और आकर्षक बन सकता है और इन योग क्रियाओं  से शरीर का वज़न भी कम किया जा सकता है। संतुलित आहार और योगासन की मदद से आप अपना जीवन एक नयी ऊर्जा से भर सकते हैं। आइये देखते हैं इन योगासनों को:

कपालभाती प्राणायाम / Kapalbhati Pranayama in Hindi
कपालभाती करने का तरीका–

इस योगासन को करने के लिए स्वच्छ, शांत और खुले वातावरण वाली जगह का चयन करें। फिर एक चटाई जैसा आसन लगा कर सामान्य मुद्रा में बैठ जाएँ। बैठे बैठे ही अपने दाएँ पैर को बायी जंघा के ऊपर और बाए पैर को दायी जंघा के नीचे लगा लें। यह आसन जमाने के बाद, साँसों को बाहर छोड़ना होता है, और पेट को अंदर की और धकेलना होता है। इस क्रिया को सुबह के समय पाँच मिनट करना चाहिए।


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कपालभाती प्राणायाम करने के लाभ –

पेट की चरबी घटाने के लिए यह एक रामबाण उपाय है। इस आसन को करने से शरीर का वज़न कम होता है। इस गुणकारी आसन के प्रभाव से मोटापा घटाने में तो मदद मिलती ही है पर, उसके साथ साथ चहेरे की सुंदरता में भी निखार आता है। अगर किसी को आँखों के नीचे dark circles हो जाने की शिकायत रहती हो तो उन्हे कपालभाती आसन रोज़ करना चाहिए। पेट की तकलीफ़ों से पीड़ित व्यक्ति भी कपालभाती कर के पेट के रोगों से मुक्ति पा सकते हैं। कब्ज़, पेट दर्द, खट्टी डकार, एसिडिटी और अन्य प्रकार की पेट की बीमारियाँ कपालभाती करने से खत्म हो जाती हैं। कपालभाती करने से शरीर में positive ऊर्जा का संचार होता है और यादाश्त भी बढ़ती जाती है। कपालभाती गले से जुड़े हर रोग को नष्ट कर देता है।

कुछ और ज़रूरी बातें:

⦁ कपालभाती आसन सुबह में करना अत्यंत गुणकारी है।
⦁ पेट साफ कर लेने के बाद (शौच के बाद) ही कपालभाती आसन करना चाहिए।
⦁ कपालभाती आसन खाली पेट करना चाहिए और इसे करने के बाद आधे घंटे तक कुछ भी ना खाएं।
⦁ सारण गाठ के रोगी, प्रेग्नेंट महिलाएं और गैस्टिक अल्सर के दर्दी इस आसन को ना करें।
⦁ शरीर में किसी भी प्रकार का ऑपरेशन कराया हो तो उन्हे डॉक्टर की सलाह लेने के बाद ही यह आसन करना चाहिए।

अनुलोम विलोम प्राणायाम /Anulom Vilom Pranayama in Hindi
अनुलोम विलोम करने का तरीका

किसी अच्छी जगह का चुनाव कर के आसन जमा लें। सामान्य मुद्रा में बैठ कर अपने पैर क्रॉस कर के मौड़ लें (पालथी लगा लें / जैसे खाना खाने ज़मीन पर बैठ ते हैं वैसे)। अब अपने दाए हाथ को दाए घुटने पर आराम से टीका दें, और बाए हाथ के अंगूठे से नाक का बाया छिद्र बाधित करें, और दाए छिद्र से गहरी साँस अंदर लें। फिर बाया छिद्र मुक्त करें और दाया छिद्र बाधित करें और अंदर ली हुई साँस बाए छिद्र से बाहर निकालें। इस प्रक्रिया को कम से कम दस से पंद्रह बार दोहराएँ।

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अनुलोम विलोम करने के लाभ –



इस प्राणायाम को नाड़ी शोधन आसन भी कहा जाता है। अनुलोम विलोम शरीर में blood circulation दुरुस्त रखने में मददगार होता है। मानव शरीर में सब से ज़्यादा चरबी, पेट, कमर और जाँघों के आसपास जमा होती है। इस आसन के प्रभाव से पेट अंदर हो जाता है। पेट की चरबी भी घट जाती है। अनुलोम विलोम से शरीर में फुर्ती महसूस होती है, साथ ही शरीर का अतिरिक्त वज़न भी काबू में आ जाता है।

नौकासन योग  / Naukasan Yogasana in Hindi
नौकासन करने का तरीका

नौकासन naukasanaसब से पहले आसन जमा लें, ओर आकाश की ओर मुंह कर के पीठ के बल सीधे लेट जाएँ। हाथों को सीधा कमर से सटा कर रखें, और अपनी हथेलियों को ज़मीन की और रखे। अब धीरे धीरे अपनी गरदन ऊपर की और ले जाएँ और अपने हाथ सीधे रख कर ही गर्दन के समान ऊपर उठाएँ और साथ साथ उसी समान अपने पैर भी उठाएँ और एक नौका का रूप लें। इसी मुद्रा में आप करीब पच्चीस से तीस सेकंड बने रहें। फिर धीरे धीरे सामान्य मुद्रा में चले जाएँ। नौकासन को दो से तीन बार दोहराएँ।

(Note – शरीर में किसी भी प्रकार का दर्द होने पर या, सामान्य से अधिक खिचाव महसूस होने पर तुरंत सामान्य अवस्था में लौट जाएँ।)

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नौकासन के लाभ 

पेट और नाभी के आसपास के भाग को सुडौल बनाने के लिए यह एक गुणकारी आसन है। इस आसन के प्रभाव से हमारी पाचन प्रणाली भी मज़बूत होती है। जब खाना ठीक से पाचन होता है तो शरीर में एक्सट्रा फैट जमा नहीं होता है और वज़न भी काबू में रहेता है। नौकाआसन करने से हमारी शरीर की छोटी आंत और बड़ी आंत को व्यायाम मिलता है। इस आसन को नित्य करने से आंतों से जुड़ी बीमारियाँ होने का खतरा नहीं रहेता है। और अगर किसी को आंतों से जुड़े रोग हैं तो वह व्यक्ति डॉक्टर की सलाह के बाद नित्य, नौकाआसन कर के आंतों के रोगों से मुक्ति पा सकता है।

कुछ और ज़रूरी बातें:

⦁ कमर से जुड़ी किसी भी प्रकार की तकलीफ से पीड़ित व्यक्ति, इस आसन का प्रयोग डॉक्टर की सलाह के बिना बिलकुल ना करें।
⦁ पेट से जुड़ी गंभीर बीमारीयों के रोगी को इस आसन का प्रयोग किसी चिकित्सक की सलाह अनुसार ही करना चाहिए।
⦁ यह आसन गर्भवती महिलाओं के लिए बिलकुल वर्जित है।

बालासन योग / Balasana Yoga in Hindi
बालासन करने का तरीका

बालासन balasanaसर्वप्रथम आसन जमा लें, फिर घुटनों को पीछे की ओर मौड़ कर घुटनों के बल बैठ जाएँ। ऐडियों पर शरीर का वज़न बनाते हुए, और साँस अंदर लेते हुए आगे की और झुकें। अब आप के हाथ सीधे होने चाहियेँ और हथेलियाँ ज़मीन की और लगी होनी चाहिए। यह सुनिश्चित करें की आप की छाती आपकी जांघों और घुटनों के अग्र भाग को छुनी चाहिये। साथ ही आप का मस्तक ज़मीन को छूना चाहिये। इस आसन को तीन से पाँच मिनट करें फिर थोड़ा आराम लें और इस आसन को चार से पाँच बार दोहराएँ।

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बालासन करने के लाभ 

यह आसन तेज़ी से वज़न कम करने के लिए काफी उपयोगी है। पेट, कमर और जांघों की चरबी इस आसन से तुरंत कम होने लगती है। बालासन के नित्य प्रयोग से शरीर की मांसपेशियां मज़बूत होती हैं। अगर पेट की तोंद बाहर निकली हुई है, और नाभी शर्ट के बटन से बाहर जांकने लगी है तो बालासन आप की यह समस्या कुछ ही दिनों में दूर कर देगा। इस आसन को रोज़ दिन में सुबह के समय पाँच से दस मिनट करने से पेट तुरंत अंदर होने लगेगा।

योगा साइकलिंग / Yoga Cycling in Hindi
योगा साइकलिंग करने का तरीका



आसन बिछा कर पीठ के बल सीधे लेट जाएँ। आप का मुख आकाश की ओर होना चाहिये। अब अपने दोनों पैर ज़मीन से ऊपर उठा लें। जैसे आप real साइकल चलाते है ठीक वैसे ही गोल गोल पेडल हवा में चलाने लगें। याद रहे की यह आसन करते समय आप के दोनों हाथ सीधे ज़मीन से लगे होने चाहिये और हथेलियाँ ज़मीन की और होनी चाहिये। थोड़ी देर सीधी साइकलिंग करें, फिर उतनी ही देर तक उल्टी पेडलिंग करते हुए साइकलिंग करें। इस कसरत को सुबह के समय दस से पंद्रह मिनट तक करें। अधिक थकान महसूस होने पर बीच-बीच में break ले कर सामान्य मुद्रा में लेट कर आराम कर लें।

योगा साइकलिंग करने के लाभ

यह कसरत पैरों की चरबी दूर करती है। योगा साइकलिंग करने से घुटनें मज़बूत होते हैं। और इस कसरत से हमारे abdominal muscles काफी strong बनते हैं। योगा साइकलिंग से पेट में गेस की तकलीफ भी दूर होती है, और पेट में जमी चरबी भी कम हो जाती है।

सेतुबंध आसन / Setubandh Asana in Hindi
सेतुबंध आसन करने का तरीका

सेतुबंध आसन setubandh asanaसर्वप्रथम आसन जमा कर पीठ के बल लेट जाएँ। मुख को आकाश की और रखे। उसके बाद अपनें दोनों घुटनों को एक साथ मौड़ कर दोनों पैरों के तलवों को ज़मीन पर अच्छे से जमा लें। अपने दोनों हाथ सीधे रख कर ज़मीन पर लगा लें। अब साँस बाहर निकालते हुए रीड़ की हड्डी की ज़मीन की और धीरे से दबाएँ। अब गहरी साँस अंदर भरते हुए अपनें पैरों को ज़मीन पर दबाएँ। अब अपने कमर के भाग को जितना हो सके उतना ऊपर की और उठाएँ। इस अवस्था में करीब एकाद मिनट तक रहें फिर साँस बाहर छोड़ते हुए सामान्य अवस्था में लेट जाएँ।

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सेतुबंध आसन करने के लाभ

इस आसन से शरीर की रीड की हड्डी मज़बूत होती है और सीधी होती है। कमर के भाग के लिए यह एक उत्तम कसरत है। सेतुबंध आसन मेरुदंड (spine) लचीला बन जाता है। इस आसन से गरदन तनाव मुक्त हो जाती है। शरीर की मांसपेशियाँ मज़बूत करना और पेट की अतिरिक्त चरबी दूर करना इस आसन के प्रमुख गुण हैं।

सूर्य नमस्कार / Surya Namaskar Yogasana in Hindi
सूर्य नमस्कार surya namaskarसूर्य नमस्कार करने वाले व्यक्ति को और कोई आसन करने की आवश्यकता नहीं रहती है। यह एक सम्पूर्ण व्यायाम है। इसीलिए इसे सभी व्यायामों का आधार बता कर यहाँ सूची के अंत में लिखा है।

सूर्य नमस्कार करने का तरीका

इस व्यायाम को बारह चरणों में किया जाता है:

सर्व प्रथम दोनों हाथ जोड़ कर सीधे खड़े रहें। साँस अंदर लेते हुए दोनों हाथों को प्रार्थना मुद्रा में जोड़ने के लिए उठाएँ। अब दोनों हाथ जोड़ते ही साँस बाहर छोड़ें।
दूसरे चरण में अपने दोनों हाथों को सीधे रखते हुए ऊपर की और ले जाएँ, और हो सके उतना पीछे की ओर मोड़ें। ध्यान रहे की कमर का संतुलन बना रहे। जब आप इस दूसरे चरण में हों तब साँस अंदर लें।
तीसरे चरण में साँस बाहर छोड़ते हुए आगे की और झुकें और अपने दाए हाथ को दाए पैर के पास हथेली ज़मीन की और कर के लगाएँ। और बाए हाथ को बाए पैर के पास हथेली ज़मीन की और कर के लगाएँ। इस मुद्रा में भी थोड़ी देर खड़े रहें।
अब साँस अंदर लेते हुए अश्व संचालन मुद्रा में आ जाईए। अपना right वाला पैर आगे करते हुए मुड़े घुटने के साथ ही दोनों हाथों के बीछ ले आयें। अब left वाले पैर का घुटना ज़मीन से लगा लें और अपने सिर को हो सके उतना ऊपर आकाश की और उठाने का प्रयत्न करें। इस मुद्रा में थोड़ी देर बने रहें।
अब साँस अंदर लेते हुए दंड आसन मुद्रा में आ जाएँ। यानि कि अपना right वाला पैर पीछे ले जाएँ। दंड आसन में आप का पूरा शरीर सपाट मुद्रा में होना चाहिये, और आप के पूरे शरीर का भार हाथों और पैरों के पंजों पर होना चाहिये। इस मुद्रा में मुख सामने की और होना चाहिये। थोड़ी देर ऐसे ही बने रहें।
छठवे चरण में साँस बाहर छोड़ते हुए अष्टांग आसन में आ जाएँ। इस आसन को यह नाम इस लिए दिया गया है चूँकि इस मुद्रा में पैर के दो पंजे, दो घूंटने, छाती, दो हाथ और ठुड्डी (दाढ़ी), कुल आठ अंग ज़मीन से लगे होते हैं। इन आठ अंगों के अलावा कोई अंग ज़मीन को ना छूए इस तरह यह मुद्रा धारण करें। इसी अवस्था में कुछ देर बने रहें।

सातवे चरण में अब साँस अंदर लेते हुए भुजंग आसन में आ जाएँ। इस आसन को अंग्रेजी में कोब्रा आसन भी कहा जाता है। भुजंग आसन में पैर के पंजे ज़मीन पर लगे होते हैं, दोनों हाथ की हथेलियाँ जमीन पर लगी होती हैं और घुटनों से ले कर नाभी तक का भाग भी ज़मीन से लगा होता है। भुजंग आसन में हाथों के पंजों के बल पर, दोनों कोहनियों को थोड़ा मोड़ कर छाती को ऊपर उठाते हुए, मुख को आकाश की और उठाना होता है।
अब साँस बाहर छोड़ते हुए पर्वत आकार मुद्रा में आ जाएँ। इस मुद्रा में हाथों और पैरों के पंजे ज़मीन पर लगे होते हैं। मुख ज़मीन की और हाथों की सीध में होता है।
नौवे चरण में फिर से अब साँस अंदर लेते हुए अश्व संचालन मुद्रा में आ जाईए। इस बार अपना left वाला पैर आगे करते हुए मुड़े घुटने के साथ ही दोनों हाथों के बीछ ले आयें। अब right वाले पैर का घुटना ज़मीन से लगा लें और अपने सिर को हो सके उतना ऊपर आकाश की और उठाने का प्रयत्न करें। इस मुद्रा में थोड़ी देर बने रहें।
दसवे चरण में साँस बाहर छोड़ते हुए आगे की और झुकें और हस्त पादआसन मुद्रा में आ जाएँ। यानि अपना right वाला पैर आगे ले आयें और अपने दाए हाथ को दाए पैर के पास, अपनी हथेली ज़मीन की और कर के दें। और बाए हाथ को बाए पैर के पास अपनी हथेली ज़मीन की और कर के लगा दें। इस मुद्रा में भी थोड़ी देर खड़े रहें।
ग्यारहवे चरण में साँस अंदर लें और हस्त उत्थान आसन में जाएँ। यानि की बिलकुल दूसरे चरण वाली मुद्रा में आ जाएँ। हाथ ऊपर की और कर के हो सके उतने पीछे की और ले जाएँ। कमर का संतुलन बनाए रखें। थोड़ी देर इस मुद्रा में स्थिर रहें।
बारह वे चरण में तड़ासन मुद्रा में आ कर सूर्य नमस्कार व्यायाम पूर्ण करें। तड़ासन में साँस बाहर छोड़ते हुए हाथ सीधे रख कर, मुख को सामने की और रख कर खड़ा होना होता है। इस आसन में शरीर भी सीधा रखें।
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विशेष
मोटापा कम करने के लिए अन्य उपयोगी आसनों में

पादव्रित्तासन
पवनमुक्तासन
द्विचक्रिकासन
त्रिकोणासन
कोणासन
पशुविश्रामासन
उत्तानपादासन
हलआसन और
अर्धहलासन भी कारगर हैं।
इनके अलावा भी कई सारे आसन शरीर को स्वस्थ और चुस्त रखने में मदद करते हैं। अगर सभी आसनों को विस्तार से लिखें तो शायद एक पूरी किताब लिक्खी जा सकती है। इसीलिए मुख्य आसनों की जानकारी इस लेख में प्रदान की गयी है।
YOGA
“The word ‘yoga’ means ‘union.’ Union means you begin to experience the universality of who you are. For example, today, modern science proves to you beyond any doubt that the whole existence is just one energy manifesting itself in various forms. If this scientific fact becomes a living reality for you – that you begin to experience everything as one – then you are in yoga. When you are in yoga, you experience everything as a part of yourself. That is liberation, that is mukti, that is ultimate freedom.” -Sadhguru

Initially, yoga was imparted by the Adiyogi (the first yogi), Shiva, over 15,000 years ago. It was Adiyogi who introduced to humanity the idea that one can evolve beyond one’s present level of existence. He poured his knowing into the legendary Sapta Rishis, or seven sages, who took the tremendous possibility offered by the yogic science to various parts of the world, including Asia, ancient Persia, northern Africa, and South America. It is this fundamental yet sophisticated science of elevating human consciousness that is the source of the world’s spiritual traditions, predating religion by many thousands of years.

Yoga For Beginners:-

How to Start a Yoga Practice

re you wondering how to start yoga? You’ve come to the right place!
If you practice yoga, you can experience a profound sense of harmony both within yourself and the world around you. Before you get into it, though, it’s important to set the right kind of atmosphere both inside and outside. Here are 5 pointers to keep in mind to optimize your yoga practice:

1. Make sure your stomach and bowels are empty.

Yoga is not just an exercise but a way of enhancing the human energy system. As Sadhguru explains, “Anything that is not the body should be out of the body if you want to move your energies upward.” So make sure to do your yoga practice before you eat (ideally in the morning before breakfast) and after emptying the bowels. And in the same vein, there should be no intake of food or water while you do the yoga practice itself.

2. Take a shower or bath.

Bathing is not just about cleaning your skin; when water comes in contact with your body, one’s interiority gets washed as well. Sadhguru recommends cool or tepid water as it makes “the pores between the skin cells open up, and that’s important for practicing yoga because we want the cellular structure of the body to be charged with a different dimension of energy.”

3. Wear loose-fitting, comfortable clothes.

As we looked at, yoga works on one’s energy system. Wearing loose-fitting clothes assists in this process. Sadhguru says, “When your energies begin to expand within you, you will notice tight-fitting clothes will not be comfortable on your body. Naturally you would want a very loose fitting cloth.”

4. Consume neem and turmeric before the yoga practice.

“The consumption of neem and turmeric with tepid, light honey water is a wonderful way of cleansing and dilating the cellular structure in such a way that it is able to absorb energy. When you do sadhana, the dilation brings flexibility to the muscles. The flexibility helps you to slowly build the system into a more powerful possibility.” -Sadhguru

5. Start with an invocation.

An invocation is a way of bringing out the best in you before you practice yoga. In the yogic culture, invocations are usually in Sanskrit, an ancient language that directly connects sounds with forms. Using sounds to activate the human system is the basis of Nada Yoga, or the yoga of sound. An invocation is a very simple form of Nada Yoga. A simple invocation that you could start with is:
Asato ma sadgamaya
Tamaso ma jyotirgamaya
Mrityor ma amritangamaya
Aum Shanti Shanti Shantihi
Lead me from untruth to truth
Lead me from darkness (ignorance) to light (knowing)
Lead me from death to deathlessness
Yoga at Home
Yoga brings you to your fullest potential – physically, mentally, emotionally and energetically. It is meant to be practiced at home daily (ideally in the morning), so that when you go out into the world for your day-to-day activities, you will be at your best in every way.
In the yogic tradition, it is advised to do yoga practices every day for at least a mandala. A mandala is a period of approximately 40 days in which time the human system completes one physiological cycle. By doing yoga at home for one mandala, you can firmly establish the yoga practice on all levels – body, mind and energy – and reap the benefits.
Mornings & Evenings
The practice of yoga can generate a lot of heat or ushna in the body. Sadhguru explains, “If the temperature outside is high and the ushna rises beyond a certain point, it will cause cellular damage.” So it is best to do your daily practice at cooler times of the day, i.e. mornings and evenings.
A Practice Area
It is best to allocate a space when doing yoga for beginners at home. When you do yoga practices in the same space every day, that space acquires a quality or energy about it which is conducive to your inner growth.
Light an Oil Lamp
Oil lamps provide light and create an aesthetic ambience, but more than that, they create a positive atmosphere of energy in your home. Lighting a lamp before you do yoga at home will surely enhance your practice.
3-ft Radius Free of Movement
Yoga recognizes that the human body is a microcosm of the larger cosmic macrocosm. The practice of yogasanas is about aligning the geometry of your system with the cosmic geometry. When such a powerful process is underway, there needs to be sufficient space for your energies to move. It is best to keep an area of 3-ft radius around you where there is no movement.
No Distractions – Music & Phones
When you practice yoga, you are aiming to shift your attention inward to the source of creation within you. Music or any kind of sound that directs your attention outward is a distraction when you want to do yoga at home. It is also best to keep your cell phone switched off or in silent mode. Keep this time just for yourself!
Types of yoga In hindi

  1. स्वस्तिकासन / Swastikasana

स्वस्तिकासन क्या है ?

स्वस्तिक का अर्थ होता है  शुभ। यह ध्यान के लिए एक उम्दा आसन है। इसके बहुत सारे शारीरक एवं मानसिक परेशानियों से आपको बचाता है।  यह तन एवं मन में संतुलन बनाने में बड़ी भूमिका निभाता है। स्वस्तिकासन का महत्त्व इस बात से समझा जा सकता है कि योगग्रंथ जैसे हठयोग प्रदीपिका,घेरण्ड सहिंता में बैठकर किये जाने वाले आसनो का अगर जिक्र किया जाये तो सबसे पहले स्वस्तिकासन का ही नाम आता है।  भगवान आदिनाथ ने जिन चार आसनो को सबसे महत्त्वपूर्ण बताया है उनमे  से एक स्वस्तिकासन भी है।
विधि:- बाएं पैर को घुटने से मोड़कर दाहिने जंघा और पिंडली (calf, घुटने के नीचे का हिस्सा) और के बीच इस प्रकार स्थापित करें की बाएं पैर का तल छिप जाये उसके बाद दाहिने पैर के पंजे और तल को बाएं पैर के नीचे से जांघ और पिंडली के मध्य स्थापित करने से स्वस्तिकासन बन जाता है। ध्यान मुद्रा में बैठें तथा रीढ़ (spine) सीधी कर श्वास खींचकर यथाशक्ति रोकें।इसी प्रक्रिया को पैर बदलकर भी करें।
लाभ:-
  • पैरों का दर्द, पसीना आना दूर होता है।
  • पैरों का गर्म या ठंडापन दूर होता है.. ध्यान हेतु बढ़िया आसन है।

आसन से लाभ

गोमुखासन क्या है ?

अर्धमत्स्येन्द्रासन करने की प्रक्रिया |How to do Ardha Matsyendrasana